Trump को झटका: अप्रवासियों को तीसरे देश डिपोर्ट करने पर अदालत ने लगाई रोक, भड़का न्याय विभाग!
वाशिंगटन: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump के विवादास्पद आव्रजन नीतियों को लेकर एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी अदालत ने उनके उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है, जिसमें अप्रवासियों को तीसरे देश में डिपोर्ट करने की योजना थी। अदालत के इस फैसले से Trump प्रशासन और न्याय विभाग में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
Trump ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी अमेरिका में अवैध अप्रवास को रोकने के लिए सख्त नीतियां अपनाई थीं। उन्होंने “Remain in Mexico” नीति लागू की थी, जिसके तहत शरणार्थियों और अवैध अप्रवासियों को अमेरिका में प्रवेश से पहले मैक्सिको में रुकने के लिए कहा गया था। इसके अलावा, Trump प्रशासन ने एक और योजना बनाई थी, जिसमें अवैध अप्रवासियों को किसी तीसरे देश में भेजा जा सकता था, जिससे अमेरिका पर बोझ कम हो।

हालांकि, इस नीति को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों और अप्रवासी अधिकार समूहों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि यह नीति शरणार्थियों के अधिकारों का हनन करती है और उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों में डाल सकती है।
अदालत का फैसला और उसके प्रभाव
अमेरिकी जिला न्यायालय के जज जॉन डी. बेट्स ने इस योजना को अवैध बताते हुए इसे लागू करने पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि यह नीति न केवल अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का भी हनन करती है।
जज बेट्स ने अपने फैसले में कहा,
“सरकार के पास किसी अप्रवासी को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी तीसरे देश में भेजने का अधिकार नहीं है। यह नीति संविधान और अमेरिकी आव्रजन कानूनों के खिलाफ है।”
इस फैसले के बाद Trump प्रशासन को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वे 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में अप्रवासन को बड़ा मुद्दा बनाना चाहते हैं।
न्याय विभाग और Trump प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस फैसले से बाइडेन प्रशासन और न्याय विभाग भड़क उठा है। न्याय विभाग ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा नीतियों के खिलाफ है।
न्याय विभाग के प्रवक्ता ने कहा,
“यह फैसला हमारे आव्रजन कानूनों को कमजोर करता है और अमेरिका की सीमाओं को असुरक्षित बना सकता है। हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।”

डोनाल्ड Trump ने भी इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा,
“डेमोक्रेट्स और उनके न्यायाधीश अमेरिका को अवैध अप्रवासियों के हवाले करना चाहते हैं। हम इस फैसले के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे!”
अप्रवासियों पर असर
इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिका में रहने वाले हजारों अप्रवासियों पर पड़ेगा। अब उन्हें किसी तीसरे देश में डिपोर्ट नहीं किया जाएगा और वे अमेरिका में ही कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सकेंगे।
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। अमेरिकी सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) के वकील जोनाथन फ्रीडमैन ने कहा,
“यह फैसला अप्रवासियों के लिए एक बड़ी जीत है। किसी भी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी अन्य देश में नहीं भेजा जाना चाहिए।”
राजनीतिक प्रभाव
यह मामला अब राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। Trump इसे 2024 के चुनाव प्रचार में इस्तेमाल कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि डेमोक्रेट्स अमेरिका की सीमाओं को असुरक्षित बना रहे हैं। वहीं, बाइडेन प्रशासन इसे मानवाधिकारों की जीत के रूप में देख रहा है।

रिपब्लिकन पार्टी के नेता इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इससे अमेरिका में अवैध अप्रवास बढ़ेगा। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ता अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बता रहे हैं।
आगे क्या होगा?
न्याय विभाग इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी इसी तरह का फैसला सुनाती है, तो Trump प्रशासन के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। वहीं, अगर सुप्रीम कोर्ट Trump की नीति को सही ठहराती है, तो अप्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, अदालत के इस फैसले से Trump प्रशासन और उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा है। अब देखना होगा कि आगे अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे पर क्या नई हलचल होती है।